Tuesday, April 22, 2014

पुर्ज़ा पुर्ज़ा मन हुआ

पुर्ज़ा पुर्ज़ा मन हुआ
मैला फिर दामन हुआ
मासूम थी  वो लाड़ली  किसी माँ बाप की 
एक सितारा आसमां  में दफ़न हुआ
पुर्ज़ा पुर्ज़ा मन हुआ
वो जो बैठे है सत्ता के मुहाने पर 
वो जो खुश है औरो को सताने पर
जख्म पर नमक छिड़कने वालो
क्या कभी जख्मी खुद का भी तन हुआ 
 पुर्ज़ा पुर्ज़ा मन हुआ
तुमसे हिसाब लेने की
ताक़त तो नहीं मुझमे
मेरे पीछे भी मज़मा हो
ये शोहरत तो नहीं मुझमे
पर सितमगर . . ये ख़बर रखना
पतंगा हूँ.. सब्र रखना
क़ुरबानी फ़ितरत में आ ही जाती है
गर मुश्किल में मेरा वतन हुआ
पुर्ज़ा पुर्ज़ा मन हुआ