Wednesday, March 27, 2019

कहां गया भई कहां गया

भोर भई पनघट की बेला
मटकी संग हिरो का रेला,
कहां गया भई कहां गया।
डालर रुपया खूब हुए पर,
बाबा का वो दमड़ी धेला,
कहा गया भई कहा गया।
मैगी, पिज़्ज़ा, बर्गर क्या कहने,
पर कुश्ती संग दूध और केला।
कहा गया भई कहा गया।
मखमल बिस्तर, नींद नहीं पर,
छत की दरी, तारो का मेंला।
कहा गया भई कहा गया।
ऐ सी गाड़ी में दम घुटता है,
टप टप करता तांगा ठेला,
कहा गया भई कहा गया।
बेडरूम संग है अटैच बाथरूम,
तूडी कोठा और भैंसो का तबेला,
कहा गया भई कहा गया।
मोबाइल ने लुटा बचपन,
तेरी मेरी बारी का झमेला,
कहा गया भई कहा गया।

===नवीन कुमार रोहिल्ला===

Saturday, March 23, 2019

उमंग

1212121212,1212121212
लो छट गई तमस घटा, है छा गई उमंग फिर।
समीर गुनगुना गई, है छेड़ कर तरंग फिर।
मै फासलों से फासले, जो नाप लूं अगर कहीं,
कि हाथ थाम कर मेरा, जो तुम चलोगे संग फिर।।

अगर गिरा है पात तो, कहीं खिला है फूल भी,
कि मंजिलों को ढूंढती, है रास्तों की धूल भी,
कदम कदम डगर डगर, शहर शहर गली गली,
ये आस्मां में उड़ रहा, है हसरतों का रंग फिर।।

चमक रहा है चांद भी, कि दूर आसमान में,
बिखर गई है चांदनी, उतर के इस जहान में,
स्वर्ग सी खिली खिली, धरा बनी दुल्हन कोई,
चरण कमल पखारता, ये जलधि हो उतंग फिर।।

घुमड़ रहे इन बादलों, का शोर भी अजीब है,
धरा को चूमने गगन, तो आ गया करीब है,
कि प्यास प्यास बुझ रही है, बूंद बूंद ओस से,
ये मन मयूर उड़ रहा है, बन के अब पतंग फिर।।

===नवीन कुमार रोहिल्ला===

Thursday, March 21, 2019

ठाठ नवाबी

क्यूं रंगवाए फागण मै तेरे, गाल गुलाबी पहलियां थे।
आंख्या मैं तेरी खूब नशा पर, यार शराबी पहलियां थे।
तू के सोच्य तेरी खातिर ही, पूछ घनी मेरी हो री स।
पूरे गाम न बेरा स मेरे, ठाठ नवाबी पहलियां थे।

देश की माटी

देश की माटी चुप रहती है,क्या कहते हो।
इसे शिकायत कितनी तुमसे, कहां रहते हो।
शायद तुम खोए रहते हो, नैनो की मधुशाला में,
जुल्फों की घोर घटाओं में या, मिलन विरह की ज्वाला में।
जब आराम से बैठे थे तुम, अपनी महल अटारी में,
पुलवामा में हुई शहादत, दुश्मन की कारगुज़ारी में।
भारत मां की पीड़ा को, सच में सहते हो?
इसे शिकायत कितनी तुमसे कहां रहते हो..
छोड़ो अब गलबहियों को, मत करना कोई शमां को रोशन,
भड़का लो अब मन की ज्वाला, जगा लो अब भीतर का यौवन।
दुश्मन आखिर कब समझा है, प्यार मोहब्बत की बात भी,
व्यर्थ गया लाहौर उतरना, व्यर्थ गई सब मुलाकात भी।
प्यार मोहब्बत की गंगा में, क्यूं बहते हो?
इसे शिकायत कितनी तुमसे कहां रहते हो..
अब ये बात बता दो उसको, आस मोहब्बत की मत रखना।
एक गोली के बदले प्यारे, दस दस गोली को तुम चखना।
अब ना कोई रहमत है और, अब दरकार ना माफी है,
गीदड़ का दिल दहलाने को एक ललकार ही काफी है।
उस गीदड़ की भभकी को, क्यूं सहते हो
इसे शिकायत कितनी तुमसे कहां रहते हो..
देश की माटी चुप रहती है,क्या कहते हो।
इसे शिकायत कितनी तुमसे, कहां रहते हो।

Sunday, March 17, 2019

प्रभु मीत

तुझसे प्रभु जब मीत हुई,
कब हार हुई कब जीत हुई,
मैं नादां अब जाना ये सब,
तेरी माया तेरी रीत हुई।
अब शिकवा न शिकायत है,
जब सब तेरी ही इनायत है
फिर काहे की भीत हुई।।
🙏

होली

कुछ हंसी ठिठोली हो जाए,
मन की रंगोली हो जाए,
इस बार करो कुछ कान्हा ऐसा,
हर दिन मेरा होली हो जाए

मिलने का वादा कर ना सको
अगर इरादा कर ना सको
इतना सा मिलन ही कर लेना,
तेरे रंग मेरी चोली हो जाए।।
नज़रों से मिलना मत नज़रे
पर आंख मिचौली हो जाए।

Monday, March 11, 2019

ग़म ए जिंदगी

कुछ मुस्कुराते फूल ख्वाबों में सजा लेता हूं।
अरमानों की बारात, दिल में बुला लेता हूं,
इसी कशमकश में उलझा कर ज़िन्दगी को,
खुदा कसम उसको उसका हर ग़म भुला देता हूं।

Sunday, March 10, 2019

शमा

अगर शमा से परवाना, कहीं नाराज हो जाए,
नए अफसाने का फिर से कोई आगाज़ हो जाए।
कि परवाने पे मरने को तरस जाए ये शमा भी,
मोहब्बत का यही आगे नया अंदाज़ हो जाए

Saturday, March 9, 2019

मेरे अपने

मेरे अपने ही मुझे आजमाने लगे है
दूरियों से रिश्ते निभाने लगे है
पल में तोड़ दिए वो सपने
जिन्हे बुनने में मुझे जमाने लगे है

शरीफ

तेरी चाहत में गुनगुनाना गुनाह हो गया
लोग माहिर काफिया ओ रद्दीफ समझ बैठे।

असर सोहबत का ही तो रहा होगा,
कातिलाना पेशा था, वो शरीफ समझ बैठे।

काफिया गमगीन है की रदिफ नजर नहीं आता।
खबरे लाल है, शहर में शरीफ नजर नहीं आता।