तेरी आखों में मैंने कुछ
अश्कों की नमी सी देखी है
धुंधली ही सही कुछ तो मगर
यादे सिमटी देखी है
मुठ्ठी में भर कर लाया हूँ
तन्हाई में इससे अपनी
दुनिया महकती देखी है
तेरी आखों में मैंने कुछ .......
धुंधली ही सही कुछ तो मगर
यादे सिमटी देखी है
ख़ामोश है लब तो शिकवा क्यातेरे बदन की खुश्बू को
बेवफा जुबां तो शिकवा क्या
इजहारे मोहब्बत हमने कातिल
नज़रों से होती देखी है
तेरी आखों में मैंने कुछ .......
मुठ्ठी में भर कर लाया हूँ
तन्हाई में इससे अपनी
दुनिया महकती देखी है
तेरी आखों में मैंने कुछ .......
साथ मेरा तुम दोगी कब तक
ये बतलाना जरुरी नहीं
पलक झपकते ही हमने ये
दुनिया बदलती देखि है।
तेरी आखों में मैंने कुछ .......