HINDI POEMS
by Naveen Kumar
Thursday, April 9, 2020
बचपन
यादों आकर मुझपे इतना, करम फक्त फरमाना तुम,
हाथ पकड़ कर मेरा मुझको बचपन मे ले जाना तुम।
देखो तुम भी भूल न जाना, बचपन बड़ा सुहाना था,
खुली छत्तो पर पतंग का मेला, और कंचो का ताना था
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