Thursday, April 9, 2020

बचपन

यादों आकर मुझपे इतना, करम फक्त फरमाना तुम,
हाथ पकड़ कर मेरा मुझको बचपन मे ले जाना तुम।
देखो तुम भी भूल न जाना, बचपन बड़ा सुहाना था,
खुली छत्तो पर पतंग का मेला, और कंचो का ताना था