Tuesday, March 24, 2015

कुछ अलग है मेरी दुनिया

कुछ अलग है मेरी दुनिया
जहाँ तुम कभी जुदा ना हो..
रहो नजरो के साए में.. 
नज़रों से गुमशुदा ना हो..
............कुछ अलग है मेरी दुनिया
ये रिश्तों का नहीं बंधन...
नहीं रस्मों का साया भी
नहीं कुछ अपना लागे तो
नहीं लागे पराया भी..
सजदो में रहें ऐसे
मेहरबां क्यों खुदा ना हो..
............कुछ अलग है मेरी दुनिया

तुम इंतज़ार करना




एक शाम ने आके हलके से ..फिर कान में कहा..
कल फिर आउंगी...तुम इंतज़ार करना
अब तलक मुझे जिसका ...मगर इंतज़ार है...
कल उतना उतना उतना...तुम मुझसे प्यार करना..
एक शाम ने आके हलके से ..फिर कान में कहा....
चलो कसम है तुम्हे खुदा की..
जिस पर मरते थे उसी अदा की..
प्रथम बार जो की थी तुमने
बातें वही दोबारा बस..दो चार करना..

कल फिर आउंगी...तुम इंतज़ार करना

Tuesday, March 10, 2015

भगवान् है बेटी



दिल में बसा अरमान है बेटी
दुनिया में पहचान है बेटी
मुझे जरुरत क्या इबादतगाहों की
मेरे घर में रहता भगवान् है बेटी

जीवन की बगिया में
खिलता सा कमल कोई
बिन उसके ये जीवन यूँ
मछली तडपे बिन जल कोई
हर एक सांस में दोड़े
तन में रहता प्राण है बेटी
मुझे जरुरत क्या इबादतगाहो की
मेरे घर में रहता भगवान् है बेटी

क़दमों में बिछा डालू
कैसे आसमां तेरे..
ये सारी कायनात तेरे...
सितारों का जहां तेरे...
मुझे तो जान से प्यारा ..
तेरा हर अरमान हैं बेटी
मुझे जरुरत क्या इबादतगाहों की
मेरे घर रहता भगवान् है बेटी..

तुम्हे मुबारक दुनिया की दौलत
तुम्हे मुबारक जमाने की शोहरत
मेरे जीवन का अनमोल खजाना
धड़कन और मुस्कान है बेटी.....
मुझे जरुरत क्या इबादतगाहो की
मेरे घर में रहता भगवान् है बेटी


दुनिया का मज़हब दुनिया जाने..
जिसको वो माने उसको माने..
मेरा तो बस इतना सा मज़हब
गीता और कुरआन है बेटी..
मुझे जरुरत क्या इबादतगाहो की

मेरे घर में रहता भगवान् है बेटी