Friday, February 27, 2015

सपनो को भी देखा है

सपनो को भी देखा है हकीक़त में बदलते हुए...
कभी घुटनों पे तो कभी ठुमक ठुमक चलते हुए...
कभी ज़िद करते हुए..और जमीं पर पसरते हुए..
तेरे अरमानो में ओ बेटी..मेरे अरमान मचलते हुए..
सपनो को भी देखा है...हकीकत में बदलते हुए....

Sunday, February 22, 2015

मेरे खुदा..

जिक्र चल रहा था अपने खुदाओ का मगर
मेरे लब से सनम का नाम निकल गया
दफ़न ये राज मेरे मन में था मगर
कमबख्त क्या हुआ कि पता शहर को चल गया..