माँ, ये मेरा पहला और आखिरी ख़त है तुमसे
इसके बाद ये बेटी तुमसे कुछ नहीं कह पाएगी
माँ, जब मेरे आने का एहसास तुम्हारे मन में आया था
माँ, जब तेरे गर्भ में मैंने अपना वजूद बनाया था
तब तुम्हारे मन में ममता की लहरें हिलोरी थी
और उस एहसास मात्र से ही तुमने कितनी खुशियां बटोरी थी
तुम पल छिन पल छिन गिना करती थी
तुम मेरे आने के सपने बुना करती थी
मुझे याद है माँ, जब मैं तेरी कोख में हिला करती थी
तुम्हे उस जानलेवा दर्द में भी कितनी ख़ुशी मिला करती थी
तेरी ममता की उस छाँव में माँ, मुझे कोई चिंता कोई फ़िक्र ना था
ना ही मुझे दुनिया की किसी बात का कोई डर था
मैं तेरी कोख में जो थी
परन्तु जैसे ही मेरा वजूद बेटी के रूप में ढला
माँ तुम बिलकुल बदल गई
तुम्हारे चेहरे पर रहने वाले खुशियों के बादल यकायक गायब हो गए
तुम्हारी ममता ने जब नफरत का रूप ले लिया, मुझे यकीं ही नहीं हुआ माँ
मैं हैरान और अवाक रह गई माँ, जब मुझे पता लगा कि
तुम मुझे दुनिया में लाने से पहले ही दुनिया से विदाई की तैयारी कर रही हो
सच में माँ, यकीं ही नहीं हुआ
बहुत चीखी बहुत चिल्लाई थी माँ
किस प्रकार वो चाक़ू छुरी मेरे अधबने जिस्म के टुकड़े टुकड़े कर रहे थे
पर तेरे चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी
हाँ, मुझसे छुटकारा पाने का एक संतोष जरुर था
माँ ये मेरा क़त्ल नहीं, ये एक ममता का क़त्ल था
मुझे दुनिया में तो आने देती माँ
मेरी काबिलियत दुनिया को तो दिखाने देती माँ
मैं भी कोई इंदिरा, कोई कल्पना बन सकती थी माँ
या फिर मदर टेरेसा बन कर तुम्हारा नाम रोशन कर सकती थी माँ
बेटो कि चाहत तो बुरी नहीं पर इतना तो सोचती माँ
अगर बेटिया ही नहीं रहेंगी तो कहाँ से होंगे बेटे भी
अंत में माँ, बस इतनी विनती है
कि किसी मासूम बेटी को कोख में मारने से पहले इतना जरुर सोचना
कि क़त्ल बेटी का नहीं, क़त्ल ममता का है, क़त्ल इंसानियत का है, क़त्ल पूरी प्रकृति का है....
अलविदा माँ अलविदा.....
इसके बाद ये बेटी तुमसे कुछ नहीं कह पाएगी
माँ, जब मेरे आने का एहसास तुम्हारे मन में आया था
माँ, जब तेरे गर्भ में मैंने अपना वजूद बनाया था
तब तुम्हारे मन में ममता की लहरें हिलोरी थी
और उस एहसास मात्र से ही तुमने कितनी खुशियां बटोरी थी
तुम पल छिन पल छिन गिना करती थी
तुम मेरे आने के सपने बुना करती थी
मुझे याद है माँ, जब मैं तेरी कोख में हिला करती थी
तुम्हे उस जानलेवा दर्द में भी कितनी ख़ुशी मिला करती थी
तेरी ममता की उस छाँव में माँ, मुझे कोई चिंता कोई फ़िक्र ना था
ना ही मुझे दुनिया की किसी बात का कोई डर था
मैं तेरी कोख में जो थी
परन्तु जैसे ही मेरा वजूद बेटी के रूप में ढला
माँ तुम बिलकुल बदल गई
तुम्हारे चेहरे पर रहने वाले खुशियों के बादल यकायक गायब हो गए
तुम्हारी ममता ने जब नफरत का रूप ले लिया, मुझे यकीं ही नहीं हुआ माँ
मैं हैरान और अवाक रह गई माँ, जब मुझे पता लगा कि
तुम मुझे दुनिया में लाने से पहले ही दुनिया से विदाई की तैयारी कर रही हो
सच में माँ, यकीं ही नहीं हुआ
बहुत चीखी बहुत चिल्लाई थी माँ
किस प्रकार वो चाक़ू छुरी मेरे अधबने जिस्म के टुकड़े टुकड़े कर रहे थे
पर तेरे चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी
हाँ, मुझसे छुटकारा पाने का एक संतोष जरुर था
माँ ये मेरा क़त्ल नहीं, ये एक ममता का क़त्ल था
मुझे दुनिया में तो आने देती माँ
मेरी काबिलियत दुनिया को तो दिखाने देती माँ
मैं भी कोई इंदिरा, कोई कल्पना बन सकती थी माँ
या फिर मदर टेरेसा बन कर तुम्हारा नाम रोशन कर सकती थी माँ
बेटो कि चाहत तो बुरी नहीं पर इतना तो सोचती माँ
अगर बेटिया ही नहीं रहेंगी तो कहाँ से होंगे बेटे भी
अंत में माँ, बस इतनी विनती है
कि किसी मासूम बेटी को कोख में मारने से पहले इतना जरुर सोचना
कि क़त्ल बेटी का नहीं, क़त्ल ममता का है, क़त्ल इंसानियत का है, क़त्ल पूरी प्रकृति का है....
अलविदा माँ अलविदा.....