भाई, माँ कुछ दिनों के लिए तुम्हारे पास आना चाहती है. कहती है रज्जू से मिले बहुत दिन हो गए है...
अरे सुनील, लगता है माँ का दिमाग बुढापे में खराब हो गया है. उनको पता तो है कि आजकल रज्जू के पेपर चल रहे है. फिर भी...नहीं सुनील, तुम जो मर्ज़ी बहाना लगा दो पर माँ को अभी अपने पास ही रखो..
भाई पर.....
पर वर कुछ नहीं. तुम्हे तो पता है ना कि रज्जू की पढ़ाई के लिए हम कितने चिंतित है. ठीक है..बाकी बाते फिर कभी..माँ को तुम संभाल लो..जो मर्ज़ी बहाना बना दो..ओके बाय ..रखता हु फ़ोन..
फ़ोन की बीप काफी देर तक उसके कानो में बजती रही....
हेल्लो सुनील,,
हाँ भाई..कैसे हो
अरे सुनील, माँ को इधर भेज देना कुछ दिनों के लिए..
वो तो ठीक है भाई...पर अभी तो रज्जू के पेपर चल रहे होंगे....
सुनील..क्या है कि आजकल तुम्हारी भाभी की तबियत ठीक नहीं है..डॉक्टर ने काम के लिए मना किया है.. माँ आ जायेगी तो तुम्हारी भाभी जल्दी ठीक हो जायेगी...और रज्जू भी ठीक ढंग से पढ़ लेगा..तुम कल ही माँ को भेज देना..
फ़ोन अब भी बंद हो गया था..पर अब उसके कानो में बीप की आवाज़ नहीं आ रही थी..क्योंकि उसका ध्यान तो उस माँ की तरफ था जो सब कुछ सुन समझ कर अपने कपडे पैक करने में लग गई थी...रज्जू से मिलना जो था..चाहे कामवाली बन कर ही सही...