पब में माल थियेटर में, शाइनिंग इंडिया का बखान
भी देखा है,
ठहरिये जनाब ठहरिये,
कूड़ा बीनते सडको पर, छोटा हिन्दुस्तान भी देखा
है..
हर बार ऊँगली आपने उठाई है गैरों पर
कभी झाँक कर खुद का, गिरेबान भी देखा है..
देखे तो खिडकियों से, इस शहर की एक एक,
घर दिखलाई दे ऐसा, कोई मकान भी देखा है...
क्यों खामोश है भागती हुई भीड़ ये लोगो की...
हमने तो जिन्दा मुर्दों का शमशान भी देखा है..
मदर्स डे फादर्स डे, बहुत मनाते हो,
माँ बाप को मनाते हुए कोई इंसान भी देखा है...
कब पत्थर में ढल गया, वो रूप बदलने में..,
इतना बदलने वाला, कोई भगवान् भी देखा है...
हर जगह बिखरे हुए हैं, आपकी तारीफ़ के फलसफे..
किसी ने दिल चीर कर, मेरा अरमान भी देखा है.....