Thursday, February 23, 2017

जहां हूँ मैं..

दुनिया की जुबान में कहते होंगे गरीब की खोली,
मेरे बाशिंदों से पूछो, उनका पूरा जहां हूँ मैं..
मंजिलो के कारवां में जज्ब एक रास्ता,
ग़ुरबत का बनाया हुआ, एक फक्त निशाँ हूँ मैं..

Monday, February 13, 2017

पतंग

मस्त पतंग मैं आसमान की,
बाँधी क्यों डोरिया संग रे बापू..
मेरा होंसला बहुत है उंचा,
दुनिया देखे तो  दंग रे बापू..
मस्त पतंग मैं आसमान की,
बाँधी क्यों डोरिया संग रे बापू..

मैं उड़ना चाहू इधर उधर,
पर डोरिया ने मुझको बाँधा रे,
आसमान उठाने की हिम्मत है,
है मजबूत मेरा कांधा रे..
नाम तेरा रोशन कर दूंगी
अभी लगा ना मेहँदी रंग रे बापू ...
मस्त पतंग मैं आसमान की,
बाँधी क्यों डोरिया संग रे बापू..

Friday, February 10, 2017

छोटा हिन्दुस्तान भी देखा है..

पब में माल थियेटर में, शाइनिंग इंडिया का बखान भी देखा है,
ठहरिये जनाब ठहरिये,
कूड़ा बीनते सडको पर, छोटा हिन्दुस्तान भी देखा है..
हर बार ऊँगली आपने उठाई है गैरों पर
कभी झाँक कर खुद का, गिरेबान भी देखा है..
देखे तो खिडकियों से, इस शहर की एक एक,
घर दिखलाई दे ऐसा, कोई मकान भी देखा है...
क्यों खामोश है भागती हुई भीड़ ये लोगो की...
हमने तो जिन्दा मुर्दों का शमशान भी देखा है..
मदर्स डे फादर्स डे, बहुत मनाते हो,
माँ बाप को मनाते हुए कोई इंसान भी देखा है...
कब पत्थर में ढल गया, वो रूप बदलने में..,
इतना बदलने वाला, कोई भगवान् भी देखा है...
हर जगह बिखरे हुए हैं, आपकी तारीफ़ के फलसफे..
किसी ने दिल चीर कर, मेरा अरमान भी देखा है.....