ना जाने इस जीवन के..
कितने है आयाम रे..
कुछ के हमने नाम सुने है..
पर कितने बेनाम रे...
हमने भी कीमत थी मांगी
पल छिन पल छिन कतरे की
सोचा था खूब मोल लगेगी
शोख अदाओं नखरे की
बिक गए हम तो बीच बाज़ारी
बिके मगर बेदाम रे...
ना जाने इस जीवन के..
कितने है आयाम रे..
पल पल गुज़रा बरसों बरसों
बरस बरस सदियों जैसा
कभी मन ठहरा शांत समन्दर
कभी लहराये नदियो जैसा
कैसी करवट मौसम बदला
अब कौन सुबहा कब शाम रे...