तज़ुर्बे जिंदगी के बड़े जालसाज़ है|
हैरान हूं कि पुछते हैं हाल दिल का वो
जो जानते हमारे दिल के सारे राज़ हैं।
अपनी वफ़ा का देखिए तो ये सिला मिला,
हम ठोकरों में और उनके सर पे ताज है।
कुछ ऐसी तुझसे इश्क़ की कहानी जिंदगी
भोर भई पनघट की बेला
मटकी संग हिरो का रेला,
कहां गया भई कहां गया।
डालर रुपया खूब हुए पर,
बाबा का वो दमड़ी धेला,
कहा गया भई कहा गया।
मैगी, पिज़्ज़ा, बर्गर क्या कहने,
पर कुश्ती संग दूध और केला।
कहा गया भई कहा गया।
मखमल बिस्तर, नींद नहीं पर,
छत की दरी, तारो का मेंला।
कहा गया भई कहा गया।
ऐ सी गाड़ी में दम घुटता है,
टप टप करता तांगा ठेला,
कहा गया भई कहा गया।
बेडरूम संग है अटैच बाथरूम,
तूडी कोठा और भैंसो का तबेला,
कहा गया भई कहा गया।
मोबाइल ने लुटा बचपन,
तेरी मेरी बारी का झमेला,
कहा गया भई कहा गया।
===नवीन कुमार रोहिल्ला===
1212121212,1212121212
लो छट गई तमस घटा, है छा गई उमंग फिर।
समीर गुनगुना गई, है छेड़ कर तरंग फिर।
मै फासलों से फासले, जो नाप लूं अगर कहीं,
कि हाथ थाम कर मेरा, जो तुम चलोगे संग फिर।।
अगर गिरा है पात तो, कहीं खिला है फूल भी,
कि मंजिलों को ढूंढती, है रास्तों की धूल भी,
कदम कदम डगर डगर, शहर शहर गली गली,
ये आस्मां में उड़ रहा, है हसरतों का रंग फिर।।
चमक रहा है चांद भी, कि दूर आसमान में,
बिखर गई है चांदनी, उतर के इस जहान में,
स्वर्ग सी खिली खिली, धरा बनी दुल्हन कोई,
चरण कमल पखारता, ये जलधि हो उतंग फिर।।
घुमड़ रहे इन बादलों, का शोर भी अजीब है,
धरा को चूमने गगन, तो आ गया करीब है,
कि प्यास प्यास बुझ रही है, बूंद बूंद ओस से,
ये मन मयूर उड़ रहा है, बन के अब पतंग फिर।।
===नवीन कुमार रोहिल्ला===
क्यूं रंगवाए फागण मै तेरे, गाल गुलाबी पहलियां थे।
आंख्या मैं तेरी खूब नशा पर, यार शराबी पहलियां थे।
तू के सोच्य तेरी खातिर ही, पूछ घनी मेरी हो री स।
पूरे गाम न बेरा स मेरे, ठाठ नवाबी पहलियां थे।
देश की माटी चुप रहती है,क्या कहते हो।
इसे शिकायत कितनी तुमसे, कहां रहते हो।
शायद तुम खोए रहते हो, नैनो की मधुशाला में,
जुल्फों की घोर घटाओं में या, मिलन विरह की ज्वाला में।
जब आराम से बैठे थे तुम, अपनी महल अटारी में,
पुलवामा में हुई शहादत, दुश्मन की कारगुज़ारी में।
भारत मां की पीड़ा को, सच में सहते हो?
इसे शिकायत कितनी तुमसे कहां रहते हो..
छोड़ो अब गलबहियों को, मत करना कोई शमां को रोशन,
भड़का लो अब मन की ज्वाला, जगा लो अब भीतर का यौवन।
दुश्मन आखिर कब समझा है, प्यार मोहब्बत की बात भी,
व्यर्थ गया लाहौर उतरना, व्यर्थ गई सब मुलाकात भी।
प्यार मोहब्बत की गंगा में, क्यूं बहते हो?
इसे शिकायत कितनी तुमसे कहां रहते हो..
अब ये बात बता दो उसको, आस मोहब्बत की मत रखना।
एक गोली के बदले प्यारे, दस दस गोली को तुम चखना।
अब ना कोई रहमत है और, अब दरकार ना माफी है,
गीदड़ का दिल दहलाने को एक ललकार ही काफी है।
उस गीदड़ की भभकी को, क्यूं सहते हो
इसे शिकायत कितनी तुमसे कहां रहते हो..
देश की माटी चुप रहती है,क्या कहते हो।
इसे शिकायत कितनी तुमसे, कहां रहते हो।
तुझसे प्रभु जब मीत हुई,
कब हार हुई कब जीत हुई,
मैं नादां अब जाना ये सब,
तेरी माया तेरी रीत हुई।
अब शिकवा न शिकायत है,
जब सब तेरी ही इनायत है
फिर काहे की भीत हुई।।
🙏
कुछ हंसी ठिठोली हो जाए,
मन की रंगोली हो जाए,
इस बार करो कुछ कान्हा ऐसा,
हर दिन मेरा होली हो जाए
मिलने का वादा कर ना सको
अगर इरादा कर ना सको
इतना सा मिलन ही कर लेना,
तेरे रंग मेरी चोली हो जाए।।
नज़रों से मिलना मत नज़रे
पर आंख मिचौली हो जाए।
कुछ मुस्कुराते फूल ख्वाबों में सजा लेता हूं।
अरमानों की बारात, दिल में बुला लेता हूं,
इसी कशमकश में उलझा कर ज़िन्दगी को,
खुदा कसम उसको उसका हर ग़म भुला देता हूं।
अगर शमा से परवाना, कहीं नाराज हो जाए,
नए अफसाने का फिर से कोई आगाज़ हो जाए।
कि परवाने पे मरने को तरस जाए ये शमा भी,
मोहब्बत का यही आगे नया अंदाज़ हो जाए
मेरे अपने ही मुझे आजमाने लगे है
दूरियों से रिश्ते निभाने लगे है
पल में तोड़ दिए वो सपने
जिन्हे बुनने में मुझे जमाने लगे है
तेरी चाहत में गुनगुनाना गुनाह हो गया
लोग माहिर काफिया ओ रद्दीफ समझ बैठे।
असर सोहबत का ही तो रहा होगा,
कातिलाना पेशा था, वो शरीफ समझ बैठे।
काफिया गमगीन है की रदिफ नजर नहीं आता।
खबरे लाल है, शहर में शरीफ नजर नहीं आता।
आज जाने की जिद ना करो
सुर्ख गालों पे नाज़ुक सा तिल,
मेरा होने को बागी है दिल।
फ़िक्र हमको भी हो क्यों अगर,
तुम हमारे हो मुस्तकबिल।
(मेरे समाजसेवी मित्र जिंदल जी को समर्पित)
आओ बच्चो तुम्हे सिखाएं ABC संविधान की,
A से एप्पल, B से बाल ना S से बात स्वान की.... अपना संविधान, है बड़ा महान...
लागू ये संविधान हुआ था 26 जनवरी दिन था प्यारा, 1950 साल था, खुश था हिन्दुस्थान सारा।
अपने अधिकारों का ये जादू का है पिटारा।
करले बाते अम्बेडकर की राजिंदर महान की,
A से एप्पल, B से बाल ना S से बात स्वान की....
A से बनता एडमिनिस्ट्रेशन, जिससे चलती सरकारें
B से बनता बैलेट बॉक्स जिसमे डालते वोट सारे
C नाम है कॉन्स्टिट्यूशन जिसको हम संविधान पुकारे।
D जो डेमोक्रेसी है बात उसके गुणगान की
A से एप्पल, B से बाल ना S से बात स्वान की....
E से इलेक्शन होता है, जिसे चुनाव कहते है
F से होती freedom कि हम, आज़ादी से रहते है
G से GST का ढांचा, जिस कर को हम सहते है
H से हॉलिडे होती है, छुट्टी बड़े आराम की
A से एप्पल, B से बाल ना S से बात स्वान की...
I इंडिपेंडेंस उसका स्वतंत्रता नाम है
J से जो जज साहिब है, न्याय उन्ही का काम है
K की नॉलिज ज्ञान बटें तो शिक्षित हर जन आम है,
L से लॉ में होती बातें, कानून और विधान की
A से एप्पल, B से बाल ना S से बात स्वान की...
M जो मनी का मैटर है वो, धन भी बहुत जरूरी है,
N की नीड जरूरत भी, होती इसी से पूरी है,
O से ऑफ्फेन्स अपराधों की, ऐसी क्या मजबूरी है
P से पुलिस व्यवस्था है, अपराधों के संज्ञान की
A से एप्पल, B से बाल ना S से बात स्वान की...
Q जो कुएस्चन ऑवर है वो लोकसभा का प्रश्नकाल है,
R से जो अधिकार राइट्स है, उन पर होता वहाँ सवाल है,
S जो स्टैट्स है उन राज्यों से, भारत देखो बूना जाल है,
T के टैक्स से विकसित होते हरपल हिंदोस्थान की
A से एप्पल, B से बाल ना S से बात स्वान की...
U से यूनिफार्म जैसे, सेना की जो वर्दी है
V से वोट जरूरी चाहे, र्है गर्मी या सर्दी है
W से विटनेस गर जालिम ने, जुल्मो की हद कर दी है
X से होता एक्सरे करनी गर जांच किसी सामान की
A से एप्पल, B से बाल ना S से बात स्वान की...
अब तो केवल दो अक्षर जो, बाकी बचे नगीना है
Y देश का युथ जवान है, देश की खातिर जीना है
Z ज़ील ऐसी हो हम में, मेहनत का खाना पीना है
कसम उठाले देश की खातिर बाज़ी लगा दे प्राण की
A से एप्पल, B से बाल ना S से बात स्वान की...
दिल का कलाम, मोहब्बत का तमगा है,
और क्या पता बताऊं मेरे महबूब के दर का।
जहां से आ रही हो फकीरों की जमात,
बस वही रास्ता है मेरे महबूब के घर का।
माना कि बागों में कांटे बहुत है,
गुलाब ही गुलाब तुम चुनते क्यों नहीं।
हकीकत अगर करे परेशान, "नवीं"
सिर्फ हंसी ख्वाब तुम बुनते क्यों नहीं
नुमाइश अपने चेहरे की.... बंद कीजिए,
शहर बसाने को झुर्रियां... है फिराक में।।
जुल्फों में भी अब कहां... नागिन सी लहर,
अब शायराना नज़रिया...डालो खाक में।।
हमने कुछ पलों से जिंदगी उधार मांगी है
बीच मझदार तूफ़ानों से, एक पतवार मांगी है।
किसी की लूट कर दुनिया, जो महफ़िल खूब सजाते हैं
उन दिल पत्थर इंसानों से, एक सरकार मांगी है।
कभी इकरार कर देखा, कभी इनकार कर देखा,
रूखे रुखसार का चुपके, हंसी दीदार कर देखा।
खता मासूम थी मेरी मगर कमबख्त कर डाली।
बिना उनकी इजाज़त के, उनसे प्यार कर देखा।
चुपके से उतर आते है कागज़ पर
अल्फ़ाज़ मेरे मन में, टिक नहीं पाते।
खरीदार कब मिला, मुझे इस बाज़ार में,
हम तो बिकने आते हैं बिक नही पाते
हम तो बिकने ब चा हैं बिक
ते पाते है दिल, खा लेते है जी भर,
ओ समय, तेरा शुक्रिया,
हम तो हम में ढले थे,
खुद के लम्हातों में पले थे,
तूने पिघलाया वजूद
और हमे बचपन में बदल दिया।
ओ समय, तेरा शुक्रिया।।।
समय, वो तू ही तो था,
जो मुझे चलाता रहा,
आगे बढ़ने को उकसाता रहा।
मैं तो ठहरा सा ही बैठा था,
अपने बचपन के आंगन में ही ऐठा था।
तू खींच कर ले गया जवानी में
फिर बुढ़ापे की चंद निशानी में।
उम्र के सब पड़ावों में घूमा दिया,
ओ समय, तेरा शुक्रिया।।।
कहां रही वो बात जनाब
जब बहते थे जज्बात जनाब।
बाहर मुहल्ले बूढ़ों की महफ़िल,
एक हुक्का, दस खाट जनाब।
....कहां रही वो बात जनाब....
बहुत हुआ रुपया और पैसा,
भूख कहां पर लगती है।
दस रोटी संग सिलबट्टा चटनी,
वो भी थी करामात जनाब।
....कहां रही वो बात जनाब....
सुना पड़ा मोहल्ला सारा,
फेसबुक का ग्रहण लगा,
अब कहाँ वो कुश्ती कब्बडी,
वो प्यार का घूंसा लात जनाब।
....कहां रही वो बात जनाब....
शहर शहर तो खोजा लेकिन,
मकान मिले पर छत ना पाई,
घर गांव की छत पे बिछौना,
और तारों से मुलाकात जनाब।
....कहां रही वो बात जनाब....
आंटी अंकल में खो गए रिश्ते,
ताऊ चाचा अब कहाँ गए।
चलो गढ़ ले फिर वो बचपन,
वही रिश्तों की बारात जनाब।
....कहां रही वो बात जनाब....
जब बहते थे जज्बात जनाब।
बाहर मुहल्ले बूढ़ों की महफ़िल,
एक हुक्का, दस खाट जनाब।
....कहां रही वो बात जनाब....
-----नवीन कुमार 7837620034---
मां जीवन का आदि सुनहरा,
मां जीवन का सुर है गहरा,
मां जीवन का सार है केवल,
मां जीवन भगवान का पहरा।।।
मां जीवन में वृक्ष की छाया,
मां जीवन में पर्वत साया,
मां जीवन में धूप सुनहरी,
मां जीवन का हर चौपाया।
मां जीवन का हल्दी उबटन,
मां जीवन की हर संजीवन,
मां जीवन में हाथ की उंगली,
मां जीवन में मरू का सावन।।।
मां जीवन में उपवन माली,
मां जीवन में फूल की डाली,
मां जीवन की कुमकुम बिंदी,
मां जीवन की पूजा थाली।।।
मां जीवन की राम और सीता
मां जीवन की भगवत गीता,
मां जीवन का गंगा जल है,
मां जीवन की वेद पुनीता।।।
मा जीवन का आज और कल है
मा जीवन का हर एक पल है
मां जीवन सांसों की डोरी
मां जीवन का हर संबल है।।।
मां जीवन की दीप और बाती,
मां मरने पर भी नहीं जाती
मां देखे तुमको रोते तो
मां फिर सामने खड़ी है पाती ।।।।
मां जीवन का आदि सुनहरा,
मां जीवन का सुर है गहरा,
मां जीवन का सार है केवल,
मां जीवन में खुदा का पहरा।।।
मां से सारी दुनिया होती,
मां से जीवन धड़कन मोती,
मां से ही संसार की ज्योति,
मां का हर आंसू मोती है,
मां रोये दुनिया रोती है।
मां को मत रोने देना तुम
मां से ही दुनिया होती है,