Saturday, September 19, 2020
Saturday, September 12, 2020
मयस्सर भी कहां होती है रोटी इस जमाने में
मयस्सर भी कहां होती है रोटी इस जमाने में
किसी की जान निकलती है निवाले दो कमाने में
आज निकले पसीने से फटा वो नोट भी आखिर
कमाया था गला कर जिस्म जो कल के मेहनताने में।।।
होती नींद है छोटी वो छोटी भी जरूरी है,
कि भूखे पेट बच्चों को तो रोटी ही जरूरी है
नहीं अब वो बहलते हैं किसी लोरी के गाने में।।
हाकिम ने कहा था हम गरीबी को मिटा देंगे,
तेरे हर एक सपने को हक़ीक़त कर दिखा देंगे
मिटे कितने मगर सपने उसके झूठे फसाने में।।।
तुझे है शौक सुनने का, तो सुनले ओ महल वाले
महल तेरे की ही खातिर, है इसके पांव में छाले
लहू इसने बहाया है तेरी दुनिया बनाने में।।।।
सुना था एक होता है, कहीं भगवान ऊपर भी
सुनता हर कोई फरियाद, कहीं भगवान ऊपर भी,
मगर बेबस है वो कितना, इसे भी हक़ दिलाने में।।।।
गुजरती उम्र उसकी है किसी का महल बनाने में।।।।
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