आभासी दुनिया पाल ली हमने,
कर फेसबुक इंस्टॉल ली हमने।
घर में चुप पर सारी बाते,
इस मुई बुक पर डाल ली हमने
छटे शराबी छटे नशेड़ी
फ़ेसबुक पर बाबा जैसे
प्रवचन रोज़ पोस्ट करे नवीन
ज्यो बैठे काशी काबा जैसे
गिनती के रिश्ते ख़त्म करके
हज़ारों फ्रेंडशिप संभाल ली हमने।
आभासी दुनिया पाल ली हमने....
Saturday, August 13, 2016
फेसबुक की दुनिया
Sunday, August 7, 2016
अपने पराये
कभी दुनिया के अपने थे,
आज खुद से पराये है,
अजब महफ़िल की रस्मे है,
गज़ब जीवन के साए है....
मोहब्बत भी बला क्या खूब
सितम सतरंगी ढाए हैं,
लबो पे शिकवा तो होगा,
मगर दिल में दुआए हैं...
कभी दुनिया के अपने थे,
आज खुद से पराये है,
मुझे मालुम है वो राज़
चमन की इन बहारों का,
नज़र से खुदा बचाए आज,
शहर वो मेरे आये हैं...
कभी दुनिया के अपने थे,
आज खुद से पराये है,
Wednesday, April 20, 2016
कोने का बुत
सजा कर घर के कोनो को
आप कितना सताते हैं
हमें ना हुक्म हिलने का है
ना हम बैठ पाते है।।
भले ठहरे हम बुत लेकिन
हैं कुछ अरमान हमारे भी
बहती धार को ज्यों देख
मचल जाते किनारे भी
बढ़ कर थाम लें दामन
ये अरमा दिल में आते है
हमें ना हुक्म हिलने का है
ना हम बैठ पाते है।।
हमसे बेरुखी इतनी
नहीं अच्छी है जानो तुम
क़यामत सर हमारे है
मानो या ना मानो तुम
जिन्दा हैं कि छूते हो
भले आप धूल हटाते हैं
हमें ना हुक्म हिलने का है
ना हम बैठ पाते है।।
डर है कब सजावट तुम
इस कोने की बदल दोगी
हटा कर मुझे किसी सुंदर
नए बुत को पहल दोगी
जुदाई कबूल अगर आंसू
आपकी आँखों भी आते है
हमें ना हुक्म हिलने का है
ना हम बैठ पाते है।।
जमाने के लिए
आती है खुश्बू उस पसीने से सदा
जो बहता है मेहनत की कमाने के लिए
चलना तो फितरत है जिंदगी तेरी
ढूंढ लेती है जगह नए रास्ते बनाने के लिए
नज़रें बचा कर निकलूं कब तक
हर मोड़ पे है किस्मत नए अफ़साने के लिए
किसने मांगे है यहाँ महल दो महले
एक कांधा ही बहुत है हमे सर छुपाने के लिए
किस किस को नाराज़ करे बगावत कर के
सह लेंगे अगर दुनिया बैठी है सितम ढाने के लिए
इस हक़ीक़त ने हमें तोडा है कयामत की तरह
कोई अपना तो हुआ, पर हुआ जमाने के लिए
दिल करता है लूटा दू जमाने की दौलत
जब लेती है 10 रूपये बिटिया सर दबाने के लिए☺