HINDI POEMS
by Naveen Kumar
Friday, August 22, 2025
रिटायरमेंट 2
हुए रिटायर चलो ये माना
अभी रवानी मगर है बाकी
अभी पुराना सफर है बीता
अभी सुहाना सफर है बाकी
वो मस्तियों का ही दौर होगा
नहीं रहेगी कोई भी टेंशन
शुक्र खुदा का कि हर महीने
आयेगी खाते में एक पेंशन
करेंगे सजदा हर एक दर पर
अभी तलक जो भी दर है बाकी...हुए रिटायर चलो ये माना
Tuesday, August 19, 2025
भारत के लाल
इस भारत की भूमि पर
कायर आंसू न टपकाना
ये खून मांगती बलिदान का
हिम्मत हो तो आ जाना
Monday, August 4, 2025
फिजिकल फाइलों वाले दिन
याद बहुत आते हैं फिजिकल फाइलों वाले दिन
मैन्युअल था हर काम मगर थे समाईलों वाले दिन
अब तो एक सी सबकी लिखावट खो गई है कलाकारी छोटी आई के ऊपर थे लगाते हम बिंदी बड़ी भारी
जलेबी जैसे सिग्नेचर के स्टाइलों वाले दिन
E office तो बहुत ही बढ़िया पर एक है मजबूरी
कैंटीन बैठ भी निपटाते जो फाइल बहुत जरूरी
अरे कैसे आए OTP मोबाइलों वाले दिन
रंग-बिरंगे फ्लैग से सज कर फाइल लगती थी न्यारी
एक एक टैग में कई कई कागज घायल उंगली थी सारी
ना चिपकू हर फ्लैग को भी चिपकाएलो वाले दिन
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