आभासी दुनिया पाल ली हमने,
कर फेसबुक इंस्टॉल ली हमने।
घर में चुप पर सारी बाते,
इस मुई बुक पर डाल ली हमने
छटे शराबी छटे नशेड़ी
फ़ेसबुक पर बाबा जैसे
प्रवचन रोज़ पोस्ट करे नवीन
ज्यो बैठे काशी काबा जैसे
गिनती के रिश्ते ख़त्म करके
हज़ारों फ्रेंडशिप संभाल ली हमने।
आभासी दुनिया पाल ली हमने....
Saturday, August 13, 2016
फेसबुक की दुनिया
Sunday, August 7, 2016
अपने पराये
कभी दुनिया के अपने थे,
आज खुद से पराये है,
अजब महफ़िल की रस्मे है,
गज़ब जीवन के साए है....
मोहब्बत भी बला क्या खूब
सितम सतरंगी ढाए हैं,
लबो पे शिकवा तो होगा,
मगर दिल में दुआए हैं...
कभी दुनिया के अपने थे,
आज खुद से पराये है,
मुझे मालुम है वो राज़
चमन की इन बहारों का,
नज़र से खुदा बचाए आज,
शहर वो मेरे आये हैं...
कभी दुनिया के अपने थे,
आज खुद से पराये है,
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