हे राम तुम कब आओगे
हे प्रभु तुम कब आओगे
दरस को तरसे नैन हमारे
कब नैनन प्यास बुझाओगे
सुनते थे तुम आते हो
पापों के तो घड़े भरे हैं
क्यों मंद मंद मुस्काते हो
बहुत लिए मुस्काए अब कब
रोद्र रूप दिखाओगे
हे प्रभु तुम कब आओगे
दरस को तरसे नैन हमारे
कब नैनन प्यास बुझाओगे
हे राम तुम कब आओगे....
पाप का जब भी घड़ा भरता हैसुनते थे तुम आते हो
पापों के तो घड़े भरे हैं
क्यों मंद मंद मुस्काते हो
बहुत लिए मुस्काए अब कब
रोद्र रूप दिखाओगे
हे राम तुम कब आओगे ....
हे राम तुम कब आओगे ....
क्यों सिमट गए हो प्रभो मेरे
मंदिर की चारदीवारी में
खुले घूमते रावण देखो
आपकी इस लाचारी में
इन सबकी नाभि भेदने
कब धनु प्रत्यंचा चढाओगे
दो गज जगह पे तुम्हे बसाने
कितनी मारामारी है
नादाँ है वो ना जाने
ये वसुंधरा ही तुम्हारी है
छोटी सी इक बात है लेकिन
कब इनको समझाओगे
हे राम तुम कब आओगे
चेताता हूँ आ जावो
निवेदन कर के मैं तो हारा
गुस्ताखी है तो वही सही
माना हूँ मैं भक्त तुम्हारा
अनुनय से तो असर नहीं
पर अब डर कर तो आओगे
हे राम तुम कब आओगे
हे प्रभु तुम कब आओगे
दरस को तरसे नैन हमारे
कब नैनन प्यास बुझाओगे