प्रिय कैसे निभेगी अपनी
प्यार मोहब्बत रिश्तेदारी
तुम नाजुक सा कनक सलोना
मैं काला कलूटा लोहा भारी
बड़े प्यार से हाथों लेकर
सुनार तुम्हें जब गढ़ता है
क्या जानो पिट लोहार हथोड़ा
दिल कितना रोता तड़पता है
तुम रानी हो शोरूम की
मैं सड़क पर फिरता भिखारी
प्रिय कैसे निभेगी अपनी
प्यार मोहब्बत रिश्तेदारी।।।।।।।।
माना हूं मैं कनक सलोना
माना हो तुम लोहा भारी
प्यार ने कब सीमा देखी है
कब प्यार ने देखी दुनियादारी
दोबारा फिर यूँ बोला तो
मर जाएगी कनक तुम्हारी
दुनिया की नजरें बुरी बहुत है
शायद तुम को पता नहीं
सोने की हिफाजत तो करती है
लोहे की बनी ही अलमारी
अपनी मोहब्बत खूब चलेगी
खूब निभेगी रिश्तेदारी
प्यार ने कब सीमा देखी है
कब प्यार ने देखी दुनियादारी।।।।।।
Friday, August 3, 2018
लोहे और सोने की प्रेम कहानी
Thursday, August 2, 2018
हिसाब जिंदगी का
हो जो फुर्सत, हिसाब लिख लेना
अच्छा चाहे, खराब लिख लेना
जिंदगी के बहुत हैं अफसाने
मेरी मानो, किताब लिख लेना।।।
इस चमन में मिलेंगे कांटे भी
सिर्फ चुनकर, गुलाब लिख लेना।।।
यूं हकीकत, से उड़ गई नींदे
मूंद पलको, को ख्वाब लिख लेना।।।
हम से पूछो ये मंज़र ए उलफत
बेवफ़ाई, जनाब लिख लेना।।
आएंगे वो भी मेरी महफ़िल में,
औढ़ कर के, नकाब लिख लेना।।।
आएंगे मकसदे क़तल महफ़िल,
ओढ़ कातिल नकाब लिख लेना।
अपनी आंखों से मय पिला दो गर,
छोड़ देंगे, शराब लिख लेना।।
हार कर सब, से अपना दिल ए नविं
जीत लोगे, खिताब लिख लेना।।।
ये नशा बन्दगी का ऐसा है
छोड़ दोगे, शराब लिख लेना।।
हो जो फुर्सत, हिसाब लिख लेना।।।।
नवीन 7837620034
Àaa
Subscribe to:
Posts (Atom)