Tuesday, November 20, 2018

लाडो

अपनी लाडो की डोली पर
क्या दुःख भी कम रहा होगा
ऊपर से मुस्काता बापू
भीतर नम रहा होगा , भीतर नम रहा होगा।

दुनिया का दस्तूर यही, तू उडके पराये घर जाना
बाबुल की याद ना करना, हर पल हर दिन मुस्काना,
तेरी ख़ुशी में खुश है हम सब, 
ये भी बेदम कहा होगा।
ऊपर से मुस्काता बापू
भीतर नम रहा होगा , भीतर नम रहा होगा।

गुमसुम सा है भाई भी,
टूट गई है माई भी,
कल तक जो लाडो अपनी थी,
हो गई आज पराई भी,
चेहरे सुने मन पत्थर,
तूफान परचम रहा होगा
ऊपर से मुस्काता बापू
भीतर नम रहा होगा , भीतर नम रहा होगा।

गुडिया भी खामोश खड़ी है,
चुप हैं सारे खिलौने भी,
किसके संग अब खेल करे वो,
किस  संग जाए सोने भी,
Tujhse bichhudne का हर लम्हा,
कदम कदम सहा होगा....
ऊपर से मुस्काता बापू
भीतर नम रहा होगा , भीतर नम रहा होगा।

यूं ही तो ये रंज नहीं है,
यूं ही तड़प नहीं होती।
दर्द ना छलके सीने में तो,
कोई आंख नहीं रोती
तुझसे रिश्ता मेरी लाडो,
जन्मों जन्म रहा होगा।
ऊपर से मुस्काता बापू
भीतर नम रहा होगा , भीतर नम रहा होगा।

Friday, August 3, 2018

लोहे और सोने की प्रेम कहानी

प्रिय कैसे निभेगी अपनी
प्यार मोहब्बत रिश्तेदारी
तुम नाजुक सा कनक सलोना
मैं काला कलूटा लोहा भारी
बड़े प्यार से हाथों लेकर
सुनार तुम्हें जब गढ़ता है
क्या जानो पिट लोहार हथोड़ा
दिल कितना रोता तड़पता है
तुम रानी हो शोरूम की
मैं सड़क पर फिरता भिखारी
प्रिय कैसे निभेगी अपनी
प्यार मोहब्बत रिश्तेदारी।।।।।।।।
माना हूं मैं कनक सलोना
माना हो तुम लोहा भारी
प्यार ने कब सीमा देखी है
कब प्यार ने देखी दुनियादारी
दोबारा फिर यूँ बोला तो
मर जाएगी कनक तुम्हारी
दुनिया की नजरें बुरी बहुत है
शायद तुम को पता नहीं
सोने की हिफाजत तो करती है
लोहे की बनी ही अलमारी
अपनी मोहब्बत खूब चलेगी
खूब निभेगी रिश्तेदारी
प्यार ने कब सीमा देखी है
कब प्यार ने देखी दुनियादारी।।।।।।

Thursday, August 2, 2018

हिसाब जिंदगी का

हो जो फुर्सत, हिसाब लिख लेना
अच्छा चाहे, खराब लिख लेना
जिंदगी के बहुत हैं अफसाने
मेरी मानो, किताब लिख लेना।।।

इस चमन में मिलेंगे कांटे भी
सिर्फ चुनकर, गुलाब लिख लेना।।।

यूं हकीकत, से उड़ गई नींदे
मूंद पलको, को ख्वाब लिख लेना।।।

हम से पूछो ये मंज़र ए उलफत
बेवफ़ाई, जनाब लिख लेना।।

आएंगे वो भी मेरी महफ़िल में,
औढ़ कर के, नकाब लिख लेना।।।

आएंगे मकसदे क़तल महफ़िल,
ओढ़ कातिल नकाब लिख लेना।

अपनी आंखों से मय पिला दो गर,
छोड़ देंगे, शराब लिख लेना।।

हार कर सब, से अपना दिल ए नविं
जीत लोगे, खिताब लिख लेना।।।

ये नशा बन्दगी का ऐसा है

छोड़ दोगे, शराब लिख लेना।।

हो जो फुर्सत, हिसाब लिख लेना।।।।

नवीन 7837620034

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