क्या दुःख भी कम रहा होगा
ऊपर से मुस्काता बापू
भीतर नम रहा होगा , भीतर नम रहा होगा।
बाबुल की याद ना करना, हर पल हर दिन मुस्काना,
तेरी ख़ुशी में खुश है हम सब,
ये भी बेदम कहा होगा।
ऊपर से मुस्काता बापू
भीतर नम रहा होगा , भीतर नम रहा होगा।
भीतर नम रहा होगा , भीतर नम रहा होगा।
गुडिया भी खामोश खड़ी है,
चुप हैं सारे खिलौने भी,
किसके संग अब खेल करे वो,
किस संग जाए सोने भी,
Tujhse bichhudne का हर लम्हा,
कदम कदम सहा होगा....
ऊपर से मुस्काता बापू
भीतर नम रहा होगा , भीतर नम रहा होगा।