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Saturday, July 28, 2012

हे राम तुम कब आओगे

हे राम तुम कब आओगे
हे प्रभु तुम कब आओगे
दरस को तरसे नैन हमारे
कब नैनन प्यास बुझाओगे
हे राम तुम कब आओगे....
पाप का जब भी घड़ा भरता है
सुनते थे तुम आते हो
पापों के तो घड़े भरे हैं
क्यों मंद मंद मुस्काते हो
बहुत लिए मुस्काए अब कब
रोद्र रूप दिखाओगे
हे राम तुम कब आओगे ....
क्यों सिमट गए हो प्रभो मेरे 
मंदिर की चारदीवारी में 
खुले घूमते रावण देखो 
आपकी इस लाचारी में 
इन सबकी नाभि भेदने 
कब धनु प्रत्यंचा चढाओगे 

हे राम तुम कब आओगे ....


दो गज जगह पे तुम्हे बसाने 
कितनी मारामारी है 
नादाँ है वो ना जाने 
ये वसुंधरा ही तुम्हारी है 
छोटी सी इक बात है लेकिन 
कब इनको समझाओगे 
हे राम तुम कब आओगे 
चेताता हूँ आ जावो 
निवेदन कर के मैं तो हारा 
गुस्ताखी है तो वही सही 
माना हूँ मैं भक्त तुम्हारा 
अनुनय से तो असर नहीं 
पर अब डर कर तो आओगे 
हे राम तुम कब आओगे 
हे प्रभु तुम कब आओगे 
दरस को तरसे नैन हमारे 
कब नैनन प्यास बुझाओगे