HINDI POEMS
by Naveen Kumar
Sunday, February 22, 2015
मेरे खुदा..
जिक्र चल रहा था अपने खुदाओ का मगर
मेरे लब से सनम का नाम निकल गया
दफ़न ये राज मेरे मन में था मगर
कमबख्त क्या हुआ कि पता शहर को चल गया..
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