Wednesday, May 6, 2015

दुनिया री दुनिया..

अजब देखी ये दुनिया भी, अजब इसकी कहानी है,
कहीं सीने में खंजर है, कहीं आँखों में पानी है..
तरसती माँ की ममता है, बड़ी व्याकुल जवानी है.
चंद कागज़ के टुकडो पर, रिश्तो की कुर्बानी है,,
अजब देखी ये दुनिया भी, अजब इसकी कहानी है।
जिसको कोख में पाला, लात उसकी ही खाई है
लब पे फिर भी दुआएं है, अजब ममता की जाइ है
 जिसको चलना सिखाया था, वो चल के चला गया कहीं दूर
उसकी एक झलक तरसे, बूढी आँखे ये मजबूर
वो इस पर यकीन करे कैसे, जो सुनते श्रवण कहानी है।
अजब देखी ये दुनिया भी, अजब इसकी कहानी है।।




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