Monday, February 13, 2017

पतंग

मस्त पतंग मैं आसमान की,
बाँधी क्यों डोरिया संग रे बापू..
मेरा होंसला बहुत है उंचा,
दुनिया देखे तो  दंग रे बापू..
मस्त पतंग मैं आसमान की,
बाँधी क्यों डोरिया संग रे बापू..

मैं उड़ना चाहू इधर उधर,
पर डोरिया ने मुझको बाँधा रे,
आसमान उठाने की हिम्मत है,
है मजबूत मेरा कांधा रे..
नाम तेरा रोशन कर दूंगी
अभी लगा ना मेहँदी रंग रे बापू ...
मस्त पतंग मैं आसमान की,
बाँधी क्यों डोरिया संग रे बापू..

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