Friday, August 3, 2018

लोहे और सोने की प्रेम कहानी

प्रिय कैसे निभेगी अपनी
प्यार मोहब्बत रिश्तेदारी
तुम नाजुक सा कनक सलोना
मैं काला कलूटा लोहा भारी
बड़े प्यार से हाथों लेकर
सुनार तुम्हें जब गढ़ता है
क्या जानो पिट लोहार हथोड़ा
दिल कितना रोता तड़पता है
तुम रानी हो शोरूम की
मैं सड़क पर फिरता भिखारी
प्रिय कैसे निभेगी अपनी
प्यार मोहब्बत रिश्तेदारी।।।।।।।।
माना हूं मैं कनक सलोना
माना हो तुम लोहा भारी
प्यार ने कब सीमा देखी है
कब प्यार ने देखी दुनियादारी
दोबारा फिर यूँ बोला तो
मर जाएगी कनक तुम्हारी
दुनिया की नजरें बुरी बहुत है
शायद तुम को पता नहीं
सोने की हिफाजत तो करती है
लोहे की बनी ही अलमारी
अपनी मोहब्बत खूब चलेगी
खूब निभेगी रिश्तेदारी
प्यार ने कब सीमा देखी है
कब प्यार ने देखी दुनियादारी।।।।।।

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