Friday, January 25, 2013

अश्कों की नमी सी देखी है

तेरी आखों में मैंने कुछ
अश्कों की नमी सी देखी है
धुंधली ही सही कुछ तो मगर
यादे सिमटी देखी है
ख़ामोश है लब तो शिकवा क्या
बेवफा जुबां तो शिकवा क्या
इजहारे मोहब्बत हमने कातिल
नज़रों से होती देखी है
तेरी आखों में मैंने कुछ .......
तेरे बदन की खुश्बू को
मुठ्ठी में भर कर लाया हूँ 
तन्हाई में इससे अपनी
दुनिया महकती देखी है
तेरी आखों में मैंने कुछ .......
साथ मेरा तुम दोगी कब तक
ये बतलाना जरुरी नहीं
पलक झपकते ही हमने ये
दुनिया बदलती देखि है।
तेरी आखों में मैंने कुछ .......


2 comments:

  1. vah!!!! kya baat hai..........
    chacha ji aap to writter ban gaye(rohan)

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  2. wah ...wah ...kya khub likha hai .... :)

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