आती है खुश्बू उस पसीने से सदा
जो बहता है मेहनत की कमाने के लिए
चलना तो फितरत है जिंदगी तेरी
ढूंढ लेती है जगह नए रास्ते बनाने के लिए
नज़रें बचा कर निकलूं कब तक
हर मोड़ पे है किस्मत नए अफ़साने के लिए
किसने मांगे है यहाँ महल दो महले
एक कांधा ही बहुत है हमे सर छुपाने के लिए
किस किस को नाराज़ करे बगावत कर के
सह लेंगे अगर दुनिया बैठी है सितम ढाने के लिए
इस हक़ीक़त ने हमें तोडा है कयामत की तरह
कोई अपना तो हुआ, पर हुआ जमाने के लिए
दिल करता है लूटा दू जमाने की दौलत
जब लेती है 10 रूपये बिटिया सर दबाने के लिए☺
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