कहां रही वो बात जनाब
जब बहते थे जज्बात जनाब।
बाहर मुहल्ले बूढ़ों की महफ़िल,
एक हुक्का, दस खाट जनाब।
....कहां रही वो बात जनाब....
बहुत हुआ रुपया और पैसा,
भूख कहां पर लगती है।
दस रोटी संग सिलबट्टा चटनी,
वो भी थी करामात जनाब।
....कहां रही वो बात जनाब....
सुना पड़ा मोहल्ला सारा,
फेसबुक का ग्रहण लगा,
अब कहाँ वो कुश्ती कब्बडी,
वो प्यार का घूंसा लात जनाब।
....कहां रही वो बात जनाब....
शहर शहर तो खोजा लेकिन,
मकान मिले पर छत ना पाई,
घर गांव की छत पे बिछौना,
और तारों से मुलाकात जनाब।
....कहां रही वो बात जनाब....
आंटी अंकल में खो गए रिश्ते,
ताऊ चाचा अब कहाँ गए।
चलो गढ़ ले फिर वो बचपन,
वही रिश्तों की बारात जनाब।
....कहां रही वो बात जनाब....
जब बहते थे जज्बात जनाब।
बाहर मुहल्ले बूढ़ों की महफ़िल,
एक हुक्का, दस खाट जनाब।
....कहां रही वो बात जनाब....
-----नवीन कुमार 7837620034---
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