ओ समय, तेरा शुक्रिया,
हम तो हम में ढले थे,
खुद के लम्हातों में पले थे,
तूने पिघलाया वजूद
और हमे बचपन में बदल दिया।
ओ समय, तेरा शुक्रिया।।।
समय, वो तू ही तो था,
जो मुझे चलाता रहा,
आगे बढ़ने को उकसाता रहा।
मैं तो ठहरा सा ही बैठा था,
अपने बचपन के आंगन में ही ऐठा था।
तू खींच कर ले गया जवानी में
फिर बुढ़ापे की चंद निशानी में।
उम्र के सब पड़ावों में घूमा दिया,
ओ समय, तेरा शुक्रिया।।।
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