हृदय पटल पर खुदे हुए है
प्रिय तीखे बोल तुम्हारे
तुमने व्यंग के बाण चला कर,
मन के श्वेतल हंस है मारे।।।।
मैंने कब कब राह तुम्हारी,
बाधायें कभी डाली थी,
तुमको मंदिर बिठलाया मेरे,
हाथ मे पूजा थाली थी।
एक पल की खुशी पे अपने,
जीवन भर के पल थे वारे।।
तुमने व्यंग के बाण चला कर,
मन के श्वेतल हंस है मारे।।।।
देखो प्रिय शिकवा तुम्हारा,
हो सकता है सच हो लेकिन,
तुम बिन जीवन जी पाऊंगा,
होगा कैसे ये भी मुमकिन,
तुम हो नदिया जिसमे बहते,
जीवन की सांसो के धारे।
जिव्हा से तो ना बोलूं पर
रोम रोम मेरा तुम्हे पुकारे
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