तड़पाते बहुत है मगर वो बेआवाज़ है
तज़ुर्बे जिंदगी के बड़े जालसाज़ है|
तज़ुर्बे जिंदगी के बड़े जालसाज़ है|
हैरान हूं कि पुछते हैं हाल दिल का वो
जो जानते हमारे दिल के सारे राज़ हैं।
अपनी वफ़ा का देखिए तो ये सिला मिला,
हम ठोकरों में और उनके सर पे ताज है।
कुछ ऐसी तुझसे इश्क़ की कहानी जिंदगी
कि ज़ख्म जो मिले है सारे ला--इलाज़ हैं।
हालात तो हमारे बदले मुफ़लिसी ने पर,
बदली है उनकी चाल और बदले मिजाज है।
तुझको समेटने की मुझको ज़िद थी जिंदगी
बिखरने के तुम्हारे भी तो अंदाज है
अब जिंदगी से वास्ता बस इतना है नवीन,
कि लुट गए मगर इसी पे करते नाज हैं।
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