मैन्युअल था हर काम मगर थे समाईलों वाले दिन
अब तो एक सी सबकी लिखावट खो गई है कलाकारी छोटी आई के ऊपर थे लगाते हम बिंदी बड़ी भारी
जलेबी जैसे सिग्नेचर के स्टाइलों वाले दिन
E office तो बहुत ही बढ़िया पर एक है मजबूरी
कैंटीन बैठ भी निपटाते जो फाइल बहुत जरूरी
अरे कैसे आए OTP मोबाइलों वाले दिन
रंग-बिरंगे फ्लैग से सज कर फाइल लगती थी न्यारी
एक एक टैग में कई कई कागज घायल उंगली थी सारी
ना चिपकू हर फ्लैग को भी चिपकाएलो वाले दिन
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