Friday, July 11, 2014

यार का आना बाकी है

मेरा जनाज़ा रोक लो यारो
सजन मनाना बाकी है
कैसे खुदा के दर पे जाऊं
यार का आना बाकी है… मेरा जनाज़ा रोक लो यारो
दिलबर रूठा दिल भर रोया
आँसू भी संग छोड़ चले
कैसे बिछड़ा यार मनाऊं
अब कोई ना ज़ोर चले 
जिस रस्ते मेरा दिलबर गुज़रे
वहाँ नज़रे बिछाना बाकी है … मेरा जनाज़ा रोक लो यारो



Thursday, July 10, 2014

भारत माँ की संतानो

भारत माँ की संतानो
फ़र्ज़ तो अपना पहचानो
माँ की लाज  खतरे में पड़ी है
दुश्मन की फिर फौज खड़ी है
नए फिरंगी आबाद हो गए
सभी जानवर आज़ाद हो गए
कहाँ से लाएं भगत सिंह को
सुभाष चन्दर की आज़ाद हिन्द को
पंज प्यारो की फ़ौज कहाँ है
सरफ़रोशी की मौज कहाँ है
होश करो क़ुछ करने की ठानो …........... फ़र्ज़ तो अपना पहचानो


मैं और मेरा साया

एक मैं और एक मेरा साया
साथ हमेशा रहे मगर हम
ना मैं उसको समझा
ना वो मुझे समझ पाया .... एक मैं और एक मेरा साया


मैं हँस दूँ  तो वो भी हँस दे
मैं रोऊँ तो रो दे 
मेरे गम की सुन के कहानी
चैन वो अपना खो दे
पर हाथ कभी तो थामना चाहा
हाथ कभी ना आया .... एक मैं और एक मेरा साया



 

Sunday, July 6, 2014

दिल दीवाना



हमने सदियाँ  लगा दी जिसे बनाने में
तुमने पल भी ना लगाया उसे चुराने में
ये दिल बे कितना बेगाना निकला
दर्द भी ना हुआ इस को , इधऱ  से उधर जाने में.
जाम पीता है हर गम, ये सुना था मगर
साक़ी को  बड़े गौर से चुना था मगर
जा कर  कह दो कोई कि झूठे है सभी 
तमाम उम्र गुज़ारी हमने मयख़ाने में





Sunday, June 29, 2014

तुम

मेरे ख्वाबों की दुनिया का, चमकता एक तारा तुम
 मन की प्यासी मरुभूमि, में अमृत की हो धारा तुम
 मेरी विनती तुम्ही से है, मेरी दुनिया मेरा जीवन
 नहीं कुछ बाकी मुझमे है, अगर कर लो किनारा तुम।
नहीं मैं खुद में रह पाऊं , नहीं तुम तुम में रह पाओ
नहीं मैं कुछ भी कह पाऊं , नहीं तुम कुछ भी कह पाओ
चलो सिमटे कहीं चल कर किसी फिर ऐसी दुनिया में
जहाँ जो तेरा मेरा हो, उसे कर दो हमारा तुम। 
भटकता एक राही हूँ , तेरी मंजिल की राहों का
तरसता एक फरयादी, तेरी बाहों निगाहों का
यही इक शूल मन में है , कहीं ऐसा ना.. हो जाए
इधर आँखे मूंदे मेरी, उधर कर दो इशारा तुम।
जो यादो में समाये ना, उसे तो भूलना अच्छा
जो दिल को याद आये ना, उसे तो भूलना अच्छा
पर कैसे भुल सकते हो मेरी जाना.. वो हर लम्हा
वो पास आना वो शर्माना...गले लगना तुम्हारा तुम

तुम



Tuesday, April 22, 2014

पुर्ज़ा पुर्ज़ा मन हुआ

पुर्ज़ा पुर्ज़ा मन हुआ
मैला फिर दामन हुआ
मासूम थी  वो लाड़ली  किसी माँ बाप की 
एक सितारा आसमां  में दफ़न हुआ
पुर्ज़ा पुर्ज़ा मन हुआ
वो जो बैठे है सत्ता के मुहाने पर 
वो जो खुश है औरो को सताने पर
जख्म पर नमक छिड़कने वालो
क्या कभी जख्मी खुद का भी तन हुआ 
 पुर्ज़ा पुर्ज़ा मन हुआ
तुमसे हिसाब लेने की
ताक़त तो नहीं मुझमे
मेरे पीछे भी मज़मा हो
ये शोहरत तो नहीं मुझमे
पर सितमगर . . ये ख़बर रखना
पतंगा हूँ.. सब्र रखना
क़ुरबानी फ़ितरत में आ ही जाती है
गर मुश्किल में मेरा वतन हुआ
पुर्ज़ा पुर्ज़ा मन हुआ