हमने सदियाँ लगा दी जिसे बनाने में
तुमने पल भी ना लगाया उसे चुराने में
ये दिल बे कितना बेगाना निकला
दर्द भी ना हुआ इस को , इधऱ से उधर जाने में.
जाम पीता है हर गम, ये सुना था मगरसाक़ी को बड़े गौर से चुना था मगरजा कर कह दो कोई कि झूठे है सभीतमाम उम्र गुज़ारी हमने मयख़ाने में
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