Saturday, January 4, 2020

भारती की लाज

एक भारत की भारती,
करती करुण पुकार।
वहसी राक्षस इधर उधर
वो बीच खड़ी मझदार।
कहाँ गया अब कान्हा प्यारा
जो राखे द्रोपदी लाज,
क्या नज़रें क्या शब्दबाण
सब बींधे मनवा पार।
दुनिया को जनने वाली
डरती दुनिया में आने से
इंसानो की दुनिया में
इंसानियत भी शर्मसार।

Thursday, January 2, 2020

व्यापार

बस इतना सा हमने व्यापार किया है।
चंद खुशियाँ को खुद से उधार लिया है।
लम्हो से इजाज़त लेकर नवीन
होंठो पे हंसी का श्रृंगार किया है।।

Sunday, December 29, 2019

तज़ुर्बे जिंदगी के

तड़पाते  बहुत है मगर वो बेआवाज़ है
तज़ुर्बे जिंदगी के बड़े जालसाज़ है|

हैरान हूं कि पुछते हैं हाल दिल का वो
जो जानते हमारे दिल के सारे राज़ हैं।

अपनी वफ़ा का देखिए तो ये सिला मिला,

हम ठोकरों में और उनके सर पे ताज है।

कुछ ऐसी तुझसे इश्क़ की कहानी जिंदगी
कि ज़ख्म जो मिले है सारे ला--इलाज़ हैं।

हालात तो हमारे बदले मुफ़लिसी ने पर,
बदली है उनकी चाल और बदले मिजाज है।

तुझको समेटने की मुझको ज़िद थी जिंदगी
बिखरने के तुम्हारे भी तो अंदाज है

अब जिंदगी से वास्ता बस इतना है नवीन,
कि लुट गए मगर इसी पे करते नाज हैं।




Saturday, December 28, 2019

मियां बीबी पति पत्नी

हृदय पटल पर खुदे हुए है
प्रिय तीखे बोल तुम्हारे
तुमने व्यंग के बाण चला कर,
मन के श्वेतल हंस है मारे।।।।
मैंने कब कब राह तुम्हारी,
बाधायें कभी डाली थी,
तुमको मंदिर बिठलाया मेरे,
हाथ मे पूजा थाली थी।
एक पल की खुशी पे अपने,
जीवन भर के पल थे वारे।।
तुमने व्यंग के बाण चला कर,
मन के श्वेतल हंस है मारे।।।।


देखो प्रिय शिकवा तुम्हारा,
हो सकता है सच हो लेकिन,
तुम बिन जीवन जी पाऊंगा,
होगा कैसे ये भी मुमकिन,
तुम हो नदिया जिसमे बहते,
जीवन की सांसो के धारे।
जिव्हा से तो ना बोलूं पर
रोम रोम मेरा तुम्हे पुकारे


Sunday, May 19, 2019

आशियाना

हटा दिया सब तिनका जाला, रोया परवाना था,
उनकी फितरत में तो केवल घर को सजाना था।
तिनका तिनका जोड़ा होगा, कोसो की परवाज़ में,
आसमान सा टूटा होगा, जिनका आशियाना था।।
तन्हाई अब तकती राहे, बेदर्द ज़माने की ।
कोई वक़्त था लम्हा लम्हा, महफ़िल का फ़साना था।।
इंसानो की आदत से मैं पहले ही वाकिफ था,
परिंदो का ही मेरे घर , बस आना जाना था।।
तेरा अब क्या काम यहाँ, अजनबी जमाने मे,
चल नवीन अब और कहीं, ये दर बेगाना था।

Sunday, May 5, 2019

ज़िन्दगी की किताब जिनके नाम की,
वो पन्नो पन्नो का हिसाब कर रहे है।

Friday, April 5, 2019

सफ़र

पाल कर मैं हसरतें, मैं हसरतों को पालता।
लड़खड़ा गए कदम, कदम कहां संभालता।
प्यार का रहा सफर, सफ़र रहा कठिन मगर।
मुश्किलों से भाग खुद, को मुश्किलों में डालता।