Saturday, January 4, 2020

भारती की लाज

एक भारत की भारती,
करती करुण पुकार।
वहसी राक्षस इधर उधर
वो बीच खड़ी मझदार।
कहाँ गया अब कान्हा प्यारा
जो राखे द्रोपदी लाज,
क्या नज़रें क्या शब्दबाण
सब बींधे मनवा पार।
दुनिया को जनने वाली
डरती दुनिया में आने से
इंसानो की दुनिया में
इंसानियत भी शर्मसार।

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