कुछ अलग है मेरी दुनिया
जहाँ तुम कभी जुदा ना हो..
रहो नजरो के साए में..
नज़रों से गुमशुदा ना हो..
............कुछ अलग है मेरी दुनिया
ये रिश्तों का नहीं बंधन...
नहीं रस्मों का साया भी
नहीं कुछ अपना लागे तो
नहीं लागे पराया भी..
सजदो में रहें ऐसे
मेहरबां क्यों खुदा ना हो..
............कुछ अलग है मेरी दुनिया
जहाँ तुम कभी जुदा ना हो..
रहो नजरो के साए में..
नज़रों से गुमशुदा ना हो..
............कुछ अलग है मेरी दुनिया
ये रिश्तों का नहीं बंधन...
नहीं रस्मों का साया भी
नहीं कुछ अपना लागे तो
नहीं लागे पराया भी..
सजदो में रहें ऐसे
मेहरबां क्यों खुदा ना हो..
............कुछ अलग है मेरी दुनिया
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