by Naveen Kumar
चुपके से उतर आते है कागज़ पर
अल्फ़ाज़ मेरे मन में, टिक नहीं पाते।
खरीदार कब मिला, मुझे इस बाज़ार में,
हम तो बिकने आते हैं बिक नही पाते
हम तो बिकने ब चा हैं बिक
ते पाते है दिल, खा लेते है जी भर,
No comments:
Post a Comment