Tuesday, January 14, 2020

व्यापार

बस इतना सा हमने व्यापार किया है।
चंद खुशियाँ को खुद से उधार लिया है।
लम्हो से इजाज़त लेकर नवीन
होंठो पे हंसी का श्रृंगार किया है।।

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