Thursday, January 24, 2019

समय

ओ समय, तेरा शुक्रिया,
हम तो हम में ढले थे,
खुद के लम्हातों में पले थे,
तूने पिघलाया वजूद
और हमे बचपन में बदल दिया।
ओ समय, तेरा शुक्रिया।।।
समय, वो तू ही तो था,
जो मुझे चलाता रहा,
आगे बढ़ने को उकसाता रहा।
मैं तो ठहरा सा ही बैठा था,
अपने बचपन के आंगन में ही ऐठा था।
तू खींच कर ले गया जवानी में
फिर बुढ़ापे की चंद निशानी में।
उम्र के सब पड़ावों में घूमा दिया,
ओ समय, तेरा शुक्रिया।।।

Monday, January 21, 2019

कहां रही वो बात जनाब

कहां रही वो बात जनाब
जब बहते थे जज्बात जनाब।
बाहर मुहल्ले बूढ़ों की महफ़िल,
एक हुक्का, दस खाट जनाब।
....कहां रही वो बात जनाब....
बहुत हुआ रुपया और पैसा,
भूख कहां पर लगती है।
दस रोटी संग सिलबट्टा चटनी,
वो भी थी करामात जनाब।
....कहां रही वो बात जनाब....
सुना पड़ा मोहल्ला सारा,
फेसबुक का ग्रहण लगा,
अब कहाँ वो कुश्ती कब्बडी,
वो प्यार का घूंसा लात जनाब।
....कहां रही वो बात जनाब....
शहर शहर तो खोजा लेकिन,
मकान मिले पर छत ना पाई,
घर गांव की छत पे बिछौना,
और तारों से मुलाकात जनाब।
....कहां रही वो बात जनाब....
आंटी अंकल में खो गए रिश्ते,
ताऊ चाचा अब कहाँ गए।
चलो गढ़ ले फिर वो बचपन,
वही रिश्तों की बारात जनाब।
....कहां रही वो बात जनाब....
जब बहते थे जज्बात जनाब।
बाहर मुहल्ले बूढ़ों की महफ़िल,
एक हुक्का, दस खाट जनाब।
....कहां रही वो बात जनाब....

-----नवीन कुमार 7837620034---

Wednesday, January 16, 2019

मां

मां जीवन का आदि सुनहरा,
मां जीवन का सुर है गहरा,
मां जीवन का सार है केवल,
मां जीवन भगवान का पहरा।।।

मां जीवन में वृक्ष की छाया,
मां जीवन में पर्वत साया,
मां जीवन में धूप सुनहरी,
मां जीवन का हर चौपाया।

मां जीवन का हल्दी उबटन,
मां जीवन की हर संजीवन,
मां जीवन में हाथ की उंगली,
मां जीवन में मरू का सावन।।।

मां जीवन में उपवन माली,
मां जीवन में फूल की डाली,
मां जीवन की कुमकुम बिंदी,
मां जीवन की पूजा थाली।।।

मां जीवन की राम और सीता
मां जीवन की भगवत गीता,
मां जीवन का गंगा जल है,
मां जीवन की वेद पुनीता।।।

मा जीवन का आज और कल है
मा जीवन का हर एक पल है
मां जीवन सांसों की डोरी
मां जीवन का हर संबल है।।।

मां जीवन की दीप और बाती,
मां मरने पर भी नहीं जाती
मां देखे तुमको रोते तो
मां फिर सामने खड़ी है पाती ।।।।

मां जीवन का आदि सुनहरा,
मां जीवन का सुर है गहरा,
मां जीवन का सार है केवल,
मां जीवन में खुदा का पहरा।।।

मां से सारी दुनिया होती,
मां से जीवन धड़कन मोती,

मां से ही संसार की ज्योति,

मां का हर आंसू मोती है,
मां रोये दुनिया रोती है।
मां को मत रोने देना तुम
मां से ही दुनिया होती है,

Tuesday, November 20, 2018

लाडो

अपनी लाडो की डोली पर
क्या दुःख भी कम रहा होगा
ऊपर से मुस्काता बापू
भीतर नम रहा होगा , भीतर नम रहा होगा।

दुनिया का दस्तूर यही, तू उडके पराये घर जाना
बाबुल की याद ना करना, हर पल हर दिन मुस्काना,
तेरी ख़ुशी में खुश है हम सब, 
ये भी बेदम कहा होगा।
ऊपर से मुस्काता बापू
भीतर नम रहा होगा , भीतर नम रहा होगा।

गुमसुम सा है भाई भी,
टूट गई है माई भी,
कल तक जो लाडो अपनी थी,
हो गई आज पराई भी,
चेहरे सुने मन पत्थर,
तूफान परचम रहा होगा
ऊपर से मुस्काता बापू
भीतर नम रहा होगा , भीतर नम रहा होगा।

गुडिया भी खामोश खड़ी है,
चुप हैं सारे खिलौने भी,
किसके संग अब खेल करे वो,
किस  संग जाए सोने भी,
Tujhse bichhudne का हर लम्हा,
कदम कदम सहा होगा....
ऊपर से मुस्काता बापू
भीतर नम रहा होगा , भीतर नम रहा होगा।

यूं ही तो ये रंज नहीं है,
यूं ही तड़प नहीं होती।
दर्द ना छलके सीने में तो,
कोई आंख नहीं रोती
तुझसे रिश्ता मेरी लाडो,
जन्मों जन्म रहा होगा।
ऊपर से मुस्काता बापू
भीतर नम रहा होगा , भीतर नम रहा होगा।

Friday, August 3, 2018

लोहे और सोने की प्रेम कहानी

प्रिय कैसे निभेगी अपनी
प्यार मोहब्बत रिश्तेदारी
तुम नाजुक सा कनक सलोना
मैं काला कलूटा लोहा भारी
बड़े प्यार से हाथों लेकर
सुनार तुम्हें जब गढ़ता है
क्या जानो पिट लोहार हथोड़ा
दिल कितना रोता तड़पता है
तुम रानी हो शोरूम की
मैं सड़क पर फिरता भिखारी
प्रिय कैसे निभेगी अपनी
प्यार मोहब्बत रिश्तेदारी।।।।।।।।
माना हूं मैं कनक सलोना
माना हो तुम लोहा भारी
प्यार ने कब सीमा देखी है
कब प्यार ने देखी दुनियादारी
दोबारा फिर यूँ बोला तो
मर जाएगी कनक तुम्हारी
दुनिया की नजरें बुरी बहुत है
शायद तुम को पता नहीं
सोने की हिफाजत तो करती है
लोहे की बनी ही अलमारी
अपनी मोहब्बत खूब चलेगी
खूब निभेगी रिश्तेदारी
प्यार ने कब सीमा देखी है
कब प्यार ने देखी दुनियादारी।।।।।।

Thursday, August 2, 2018

हिसाब जिंदगी का

हो जो फुर्सत, हिसाब लिख लेना
अच्छा चाहे, खराब लिख लेना
जिंदगी के बहुत हैं अफसाने
मेरी मानो, किताब लिख लेना।।।

इस चमन में मिलेंगे कांटे भी
सिर्फ चुनकर, गुलाब लिख लेना।।।

यूं हकीकत, से उड़ गई नींदे
मूंद पलको, को ख्वाब लिख लेना।।।

हम से पूछो ये मंज़र ए उलफत
बेवफ़ाई, जनाब लिख लेना।।

आएंगे वो भी मेरी महफ़िल में,
औढ़ कर के, नकाब लिख लेना।।।

आएंगे मकसदे क़तल महफ़िल,
ओढ़ कातिल नकाब लिख लेना।

अपनी आंखों से मय पिला दो गर,
छोड़ देंगे, शराब लिख लेना।।

हार कर सब, से अपना दिल ए नविं
जीत लोगे, खिताब लिख लेना।।।

ये नशा बन्दगी का ऐसा है

छोड़ दोगे, शराब लिख लेना।।

हो जो फुर्सत, हिसाब लिख लेना।।।।

नवीन 7837620034

Àaa

Thursday, February 23, 2017

जहां हूँ मैं..

दुनिया की जुबान में कहते होंगे गरीब की खोली,
मेरे बाशिंदों से पूछो, उनका पूरा जहां हूँ मैं..
मंजिलो के कारवां में जज्ब एक रास्ता,
ग़ुरबत का बनाया हुआ, एक फक्त निशाँ हूँ मैं..