वो बहकती जुबान वो फिसलती नज़र
मिलने की कसक ..वियोग तड़प
कोमल हाथों का मासूम स्पर्श
......कुछ तो याद करो
प्रत्येक झलक को आतुर मन
फिर हृदय को वो तीव्र स्पंदन
और स्पर्श मात्र से कांपता तन
.....कुछ तो याद करो
पिछवाड़े वो बाग़ का कोना
शिकवे गिलों में समय का खोना
दुनिया का कोई डर ना होना
..... कुछ तो याद करो
अंखियों में अंसुवन की थिरकन
एक दूजे से करती शिकवन
धड़कन से फिर मिलती धड़कन
.....कुछ तो याद करो
मिल कर कुछ करने की कसमें
कदम थामती अनजान सी रस्में
कुछ बस में तो कुछ ना बस में
....कुछ तो याद करो
....कुछ तो याद करो
मिलने की कसक ..वियोग तड़प
कोमल हाथों का मासूम स्पर्श
......कुछ तो याद करो
प्रत्येक झलक को आतुर मन
फिर हृदय को वो तीव्र स्पंदन
और स्पर्श मात्र से कांपता तन
.....कुछ तो याद करो
पिछवाड़े वो बाग़ का कोना
शिकवे गिलों में समय का खोना
दुनिया का कोई डर ना होना
..... कुछ तो याद करो
अंखियों में अंसुवन की थिरकन
एक दूजे से करती शिकवन
धड़कन से फिर मिलती धड़कन
.....कुछ तो याद करो
मिल कर कुछ करने की कसमें
कदम थामती अनजान सी रस्में
कुछ बस में तो कुछ ना बस में
....कुछ तो याद करो
....कुछ तो याद करो
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