Wednesday, December 26, 2012

चंचल बाला

  

चतुर चपल एक चंचल बाला 
सादगी का ओढ़ दुशाला
जब जब नज़रों से बतियाती
तब तब लगती मधुशाला

चतुर चपल एक चंचल बाला

 

सुरभि बन वो वन महकाए
तन बदन जोबन लहराए
मोती बन वाणी झरती है
जब जब खोले लबों का प्याला

चतुर चपल एक चंचल बाला

 

अमावस सी जुल्फों की छाया
कुंदन तन और कंचन काया
नैनों में है झील बसेरा
मुख मंडल का तेज निराला

 चतुर चपल एक चंचल बाला

 

कोमल मन सी राजकुमारी
कायनात सारी बलिहारी
जिस घर अंगना जायेगी
होगा वो किस्मत वाला

चतुर चपल एक चंचल बाला

 

सादगी का ओढ़ दुशाला
जब जब नज़रों से बतियाती

तब तब लगती मधुशाला

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