चतुर चपल एक चंचल बाला
सादगी का ओढ़ दुशाला
जब जब नज़रों से बतियाती
तब तब लगती मधुशालाचतुर चपल एक चंचल बाला
सुरभि बन वो वन महकाए
तन बदन जोबन लहराए
मोती बन वाणी झरती है
जब जब खोले लबों का प्यालाचतुर चपल एक चंचल बाला
अमावस सी जुल्फों की छाया
कुंदन तन और कंचन काया
नैनों में है झील बसेरा
मुख मंडल का तेज निरालाचतुर चपल एक चंचल बाला
कोमल मन सी राजकुमारी
कायनात सारी बलिहारी
जिस घर अंगना जायेगी
होगा वो किस्मत वालाचतुर चपल एक चंचल बाला
सादगी का ओढ़ दुशाला
जब जब नज़रों से बतियातीतब तब लगती मधुशाला

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