हर सितारा गर्दिश में
फिर आसमां से क्या बोलें
कलियों का चमन भी मुरझाया
फिर बागबां से क्या बोलें
फिर आसमां से क्या बोलें
कलियों का चमन भी मुरझाया
फिर बागबां से क्या बोलें
भीड़ यहां इंसानो की
पर हर इंसान अकेला है
शोर जहां से आता है
वो तन्हाई का मेला है
तन्हा तुम हो तन्हा मैं हूँ
फिर कारवां से क्या बोलें
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