Saturday, February 2, 2019

नुमाइश

नुमाइश अपने चेहरे की.... बंद कीजिए,
शहर बसाने को झुर्रियां... है फिराक में।।

जुल्फों में भी अब कहां... नागिन सी लहर,
अब शायराना नज़रिया...डालो खाक में।।

सरकार मांगी है

हमने कुछ पलों से जिंदगी उधार मांगी है
बीच मझदार तूफ़ानों से, एक पतवार मांगी है।
किसी की लूट कर दुनिया, जो महफ़िल खूब सजाते हैं
उन दिल पत्थर इंसानों से, एक सरकार मांगी है।

प्यार कर देखा

कभी इकरार कर देखा, कभी इनकार कर देखा,
रूखे रुखसार का चुपके, हंसी दीदार कर देखा।
खता मासूम थी मेरी मगर कमबख्त कर डाली।
बिना उनकी इजाज़त के, उनसे प्यार कर देखा।

अल्फ़ाज़

चुपके से उतर आते है कागज़ पर

अल्फ़ाज़ मेरे मन में, टिक नहीं पाते।

खरीदार कब मिला, मुझे इस बाज़ार में,

हम तो बिकने आते हैं बिक नही पाते


हम तो बिकने ब चा हैं बिक 

ते पाते है दिल, खा लेते है जी भर,

Thursday, January 24, 2019

समय

ओ समय, तेरा शुक्रिया,
हम तो हम में ढले थे,
खुद के लम्हातों में पले थे,
तूने पिघलाया वजूद
और हमे बचपन में बदल दिया।
ओ समय, तेरा शुक्रिया।।।
समय, वो तू ही तो था,
जो मुझे चलाता रहा,
आगे बढ़ने को उकसाता रहा।
मैं तो ठहरा सा ही बैठा था,
अपने बचपन के आंगन में ही ऐठा था।
तू खींच कर ले गया जवानी में
फिर बुढ़ापे की चंद निशानी में।
उम्र के सब पड़ावों में घूमा दिया,
ओ समय, तेरा शुक्रिया।।।

Monday, January 21, 2019

कहां रही वो बात जनाब

कहां रही वो बात जनाब
जब बहते थे जज्बात जनाब।
बाहर मुहल्ले बूढ़ों की महफ़िल,
एक हुक्का, दस खाट जनाब।
....कहां रही वो बात जनाब....
बहुत हुआ रुपया और पैसा,
भूख कहां पर लगती है।
दस रोटी संग सिलबट्टा चटनी,
वो भी थी करामात जनाब।
....कहां रही वो बात जनाब....
सुना पड़ा मोहल्ला सारा,
फेसबुक का ग्रहण लगा,
अब कहाँ वो कुश्ती कब्बडी,
वो प्यार का घूंसा लात जनाब।
....कहां रही वो बात जनाब....
शहर शहर तो खोजा लेकिन,
मकान मिले पर छत ना पाई,
घर गांव की छत पे बिछौना,
और तारों से मुलाकात जनाब।
....कहां रही वो बात जनाब....
आंटी अंकल में खो गए रिश्ते,
ताऊ चाचा अब कहाँ गए।
चलो गढ़ ले फिर वो बचपन,
वही रिश्तों की बारात जनाब।
....कहां रही वो बात जनाब....
जब बहते थे जज्बात जनाब।
बाहर मुहल्ले बूढ़ों की महफ़िल,
एक हुक्का, दस खाट जनाब।
....कहां रही वो बात जनाब....

-----नवीन कुमार 7837620034---

Wednesday, January 16, 2019

मां

मां जीवन का आदि सुनहरा,
मां जीवन का सुर है गहरा,
मां जीवन का सार है केवल,
मां जीवन भगवान का पहरा।।।

मां जीवन में वृक्ष की छाया,
मां जीवन में पर्वत साया,
मां जीवन में धूप सुनहरी,
मां जीवन का हर चौपाया।

मां जीवन का हल्दी उबटन,
मां जीवन की हर संजीवन,
मां जीवन में हाथ की उंगली,
मां जीवन में मरू का सावन।।।

मां जीवन में उपवन माली,
मां जीवन में फूल की डाली,
मां जीवन की कुमकुम बिंदी,
मां जीवन की पूजा थाली।।।

मां जीवन की राम और सीता
मां जीवन की भगवत गीता,
मां जीवन का गंगा जल है,
मां जीवन की वेद पुनीता।।।

मा जीवन का आज और कल है
मा जीवन का हर एक पल है
मां जीवन सांसों की डोरी
मां जीवन का हर संबल है।।।

मां जीवन की दीप और बाती,
मां मरने पर भी नहीं जाती
मां देखे तुमको रोते तो
मां फिर सामने खड़ी है पाती ।।।।

मां जीवन का आदि सुनहरा,
मां जीवन का सुर है गहरा,
मां जीवन का सार है केवल,
मां जीवन में खुदा का पहरा।।।

मां से सारी दुनिया होती,
मां से जीवन धड़कन मोती,

मां से ही संसार की ज्योति,

मां का हर आंसू मोती है,
मां रोये दुनिया रोती है।
मां को मत रोने देना तुम
मां से ही दुनिया होती है,