by Naveen Kumar
हमने कुछ पलों से जिंदगी उधार मांगी है बीच मझदार तूफ़ानों से, एक पतवार मांगी है। किसी की लूट कर दुनिया, जो महफ़िल खूब सजाते हैं उन दिल पत्थर इंसानों से, एक सरकार मांगी है।
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