Saturday, February 2, 2019

नुमाइश

नुमाइश अपने चेहरे की.... बंद कीजिए,
शहर बसाने को झुर्रियां... है फिराक में।।

जुल्फों में भी अब कहां... नागिन सी लहर,
अब शायराना नज़रिया...डालो खाक में।।

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