by Naveen Kumar
नुमाइश अपने चेहरे की.... बंद कीजिए, शहर बसाने को झुर्रियां... है फिराक में।।
जुल्फों में भी अब कहां... नागिन सी लहर, अब शायराना नज़रिया...डालो खाक में।।
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