लड़खड़ा गए कदम, कदम कहां संभालता।
प्यार का रहा सफर, सफ़र रहा कठिन मगर।
मुश्किलों से भाग खुद, को मुश्किलों में डालता।
भोर भई पनघट की बेला
मटकी संग हिरो का रेला,
कहां गया भई कहां गया।
डालर रुपया खूब हुए पर,
बाबा का वो दमड़ी धेला,
कहा गया भई कहा गया।
मैगी, पिज़्ज़ा, बर्गर क्या कहने,
पर कुश्ती संग दूध और केला।
कहा गया भई कहा गया।
मखमल बिस्तर, नींद नहीं पर,
छत की दरी, तारो का मेंला।
कहा गया भई कहा गया।
ऐ सी गाड़ी में दम घुटता है,
टप टप करता तांगा ठेला,
कहा गया भई कहा गया।
बेडरूम संग है अटैच बाथरूम,
तूडी कोठा और भैंसो का तबेला,
कहा गया भई कहा गया।
मोबाइल ने लुटा बचपन,
तेरी मेरी बारी का झमेला,
कहा गया भई कहा गया।
===नवीन कुमार रोहिल्ला===
1212121212,1212121212
लो छट गई तमस घटा, है छा गई उमंग फिर।
समीर गुनगुना गई, है छेड़ कर तरंग फिर।
मै फासलों से फासले, जो नाप लूं अगर कहीं,
कि हाथ थाम कर मेरा, जो तुम चलोगे संग फिर।।
अगर गिरा है पात तो, कहीं खिला है फूल भी,
कि मंजिलों को ढूंढती, है रास्तों की धूल भी,
कदम कदम डगर डगर, शहर शहर गली गली,
ये आस्मां में उड़ रहा, है हसरतों का रंग फिर।।
चमक रहा है चांद भी, कि दूर आसमान में,
बिखर गई है चांदनी, उतर के इस जहान में,
स्वर्ग सी खिली खिली, धरा बनी दुल्हन कोई,
चरण कमल पखारता, ये जलधि हो उतंग फिर।।
घुमड़ रहे इन बादलों, का शोर भी अजीब है,
धरा को चूमने गगन, तो आ गया करीब है,
कि प्यास प्यास बुझ रही है, बूंद बूंद ओस से,
ये मन मयूर उड़ रहा है, बन के अब पतंग फिर।।
===नवीन कुमार रोहिल्ला===
क्यूं रंगवाए फागण मै तेरे, गाल गुलाबी पहलियां थे।
आंख्या मैं तेरी खूब नशा पर, यार शराबी पहलियां थे।
तू के सोच्य तेरी खातिर ही, पूछ घनी मेरी हो री स।
पूरे गाम न बेरा स मेरे, ठाठ नवाबी पहलियां थे।
देश की माटी चुप रहती है,क्या कहते हो।
इसे शिकायत कितनी तुमसे, कहां रहते हो।
शायद तुम खोए रहते हो, नैनो की मधुशाला में,
जुल्फों की घोर घटाओं में या, मिलन विरह की ज्वाला में।
जब आराम से बैठे थे तुम, अपनी महल अटारी में,
पुलवामा में हुई शहादत, दुश्मन की कारगुज़ारी में।
भारत मां की पीड़ा को, सच में सहते हो?
इसे शिकायत कितनी तुमसे कहां रहते हो..
छोड़ो अब गलबहियों को, मत करना कोई शमां को रोशन,
भड़का लो अब मन की ज्वाला, जगा लो अब भीतर का यौवन।
दुश्मन आखिर कब समझा है, प्यार मोहब्बत की बात भी,
व्यर्थ गया लाहौर उतरना, व्यर्थ गई सब मुलाकात भी।
प्यार मोहब्बत की गंगा में, क्यूं बहते हो?
इसे शिकायत कितनी तुमसे कहां रहते हो..
अब ये बात बता दो उसको, आस मोहब्बत की मत रखना।
एक गोली के बदले प्यारे, दस दस गोली को तुम चखना।
अब ना कोई रहमत है और, अब दरकार ना माफी है,
गीदड़ का दिल दहलाने को एक ललकार ही काफी है।
उस गीदड़ की भभकी को, क्यूं सहते हो
इसे शिकायत कितनी तुमसे कहां रहते हो..
देश की माटी चुप रहती है,क्या कहते हो।
इसे शिकायत कितनी तुमसे, कहां रहते हो।
तुझसे प्रभु जब मीत हुई,
कब हार हुई कब जीत हुई,
मैं नादां अब जाना ये सब,
तेरी माया तेरी रीत हुई।
अब शिकवा न शिकायत है,
जब सब तेरी ही इनायत है
फिर काहे की भीत हुई।।
🙏
कुछ हंसी ठिठोली हो जाए,
मन की रंगोली हो जाए,
इस बार करो कुछ कान्हा ऐसा,
हर दिन मेरा होली हो जाए
मिलने का वादा कर ना सको
अगर इरादा कर ना सको
इतना सा मिलन ही कर लेना,
तेरे रंग मेरी चोली हो जाए।।
नज़रों से मिलना मत नज़रे
पर आंख मिचौली हो जाए।