by Naveen Kumar
तुझसे प्रभु जब मीत हुई, कब हार हुई कब जीत हुई, मैं नादां अब जाना ये सब, तेरी माया तेरी रीत हुई। अब शिकवा न शिकायत है, जब सब तेरी ही इनायत है फिर काहे की भीत हुई।। 🙏
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