Saturday, February 2, 2019

हंसी ख्वाब

माना कि बागों में कांटे बहुत है,
गुलाब ही गुलाब तुम चुनते क्यों नहीं।
हकीकत अगर करे परेशान, "नवीं"
सिर्फ हंसी ख्वाब तुम बुनते क्यों नहीं

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