by Naveen Kumar
माना कि बागों में कांटे बहुत है, गुलाब ही गुलाब तुम चुनते क्यों नहीं। हकीकत अगर करे परेशान, "नवीं" सिर्फ हंसी ख्वाब तुम बुनते क्यों नहीं
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