by Naveen Kumar
आज जाने की जिद ना करो सुर्ख गालों पे नाज़ुक सा तिल, मेरा होने को बागी है दिल। फ़िक्र हमको भी हो क्यों अगर, तुम हमारे हो मुस्तकबिल।
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