HINDI POEMS
by Naveen Kumar
Saturday, February 9, 2019
रोशनदान
न रोको रोशन दानों को, तुम महल चोबारो की खातिर, मेहमा बन दिलशाद हवाएं, यहां से आती जाती है। तुम क्या जानो सर्द धूप भी, चोरी चोरी चुपके चुपके
मेरे आंगन में खूब पसर कर, सारा दिन सुस्ताती है। देखा है अक्सर उस चिड़िया को, जो तिनका ले कर आती है। बना घोंसला घर की कडी में, फुली नहीं समाती है।
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